Monday, November 16, 2015

बदलता दौर


*****बदलता दौर*****

पहले DD का दौर था,
अब HD का जमाना है,

पहले हम घर में रहते थे,
अब हम फ्लैट ढूंढ़ते हैं,

पहले घर-घर रामायण थी,
अब हर देश महाभारत है,

पहले फिरंगियों से डरते थे
अब आतंकियों से मरते हैं,

पहले खुशियाँ  हज़ारों थी
अब तो ग़म ढेर सारो है,
                                   (मौलिक)

Sunday, November 8, 2015

दीपावली आ चुकी है...

दीपावली आ चुकी है, 
अमावस का अँधेरा छँट गया है,
उजाले का आगमन हो रहा है,
ज्योति कलश छलक रहा है,
दीपावली आ चुकी है, 

गणेश जी आये है चूहे पर, 
लक्ष्मी की पायल खनकी,
विद्वता सरस्वती थामे, खड़ी हैं चौखट पर
दीपावली आ चुकी है, 

प्रफुल्लित मन हो रहा है, 
हार की हताशा नहीं है, 
जीत का जश्न हर कहीं है,
दीपावली आ चुकी है, 

चहुँओर दिया की जलती बाती है,
हर लबों पर दुआ आती है,
डाली फूलों को महकाती है,
दीपावली आ चुकी है.