Monday, January 11, 2016

मनु, मैच, मजा और मंगलवार

मनु, मैच, मजा और मंगलवार
मंगलवार गुजरा। मजेदार गुजरा। मैच का मजा आया। रोहित शर्मा खूब खेले। भारत का डंका बजा। विदेशी सरजमीं पर। आस्ट्रेलिया की धरती पर। जमकर रन बरसे। तालियां....। इससे बेहतर युवा दिवस का सेलीब्रेशन क्या हो सकता है। जब एक नौजवान खिलाड़ी ने अपनी क्षमताओं से आगे जाकर विदेशी खिलाडि़यों की हर तरकीब और समझ को नाकामी में बदल दिया। इसे भारत की काबिलियत कहना गलत नहीं होगा। स्वामी विवेकानंद यानी मनु के जन्मदिवस पर भारत के एक खिलाड़ी का इस तरह खेलना वाकई काबिले तारीफ है। उसने विवेकानंद की उस कहानी को चरितार्थ किया, जिस रोज विवेकानंद बनारस की गलियों में बंदरों के खौफ से एक कदम भी आगे बढ़ाने से डर रहे थे, लेकिन अगले ही पल पीछे से एक बुजुर्ग ने उनको नसीहत दी। डरो मत, उठो, पलटो और आगे बढ़ो। इस मूलमंत्र को लेकर जब स्वामी विवेकानंद आगे चले तो बंदरों ने उन्हें जाने का रास्ता दे दिया। शायद, यही फंडा रोहित शर्मा ने अपनाया। उठे, आगे बढ़े और जमकर खेले। 171 का स्कोर खड़ा कर दिया। विराट भी उनके साथ कदमताल करते रहे। सलाम, रोहित के जज्बे को। दरअसल, रोहित अकेले युवा नहीं है, जो अपनी प्रतिभा से विदेश की धरती पर चमके हैं। बल्कि युवाओं से सशक्त भारत अपनी क्षमताओं को विश्व को निरंतर हैरान कर रहा है। चाहे कोई क्षेत्र हो। अध्यात्म, खेल, मनोरंजन, राजनीति। हर क्षेत्र में वाहवाही। भारतीयों का प्रदर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना दशकों पहले था। 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के अवसर पर स्वामी विवेकानंद ने ओजस्वी भाषण देकर समूचे विश्व को चैंका दिया था, और आज रोहित शर्मा ने।

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