यह कुदरत है. कुदरत ने सभी को जीने का अधिकार दिया है. भूख मिटाने का हक भी सभी को है. फिर चाहे इंसान हो या निरीह पशु-पक्षी. दोनों ही अपनी जिंदगी और भूख के लिए ताउम्र जद्दोजहद में लगे रहते हैं. सांस मिटने तक संघर्ष करते हैं. इस संघर्षशील जीवन में कोई सफल होता है और किसी को असफलता हाथ लगती है. बस यूं ही प्रकृति की जीवन श्रंखला चलती रहती है.
अब तस्वीरों में कौवा और चूहा को ही देखिए. दोनों ही भूखे हैं, लेकिन दोनों की भूख अलग है. कौवा भोजन के लिए तड़प रहा है और चूहा अपनी जिंदगी बचाने के लिए. अपनी-अपनी जगह दोनों ही कुदरती नियम का पालन कर रहे हैं. यह नियम है अपनी भूख को शांत करने का संघर्ष.
अब तस्वीरों में कौवा और चूहा को ही देखिए. दोनों ही भूखे हैं, लेकिन दोनों की भूख अलग है. कौवा भोजन के लिए तड़प रहा है और चूहा अपनी जिंदगी बचाने के लिए. अपनी-अपनी जगह दोनों ही कुदरती नियम का पालन कर रहे हैं. यह नियम है अपनी भूख को शांत करने का संघर्ष.
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