Monday, June 18, 2018

भूख और जिंदगी की जंग

यह कुदरत है. कुदरत ने सभी को जीने का अधिकार दिया है. भूख मिटाने का हक भी सभी को है. फिर चाहे इंसान हो या निरीह पशु-पक्षी. दोनों ही अपनी जिंदगी और भूख के लिए ताउम्र जद्दोजहद में लगे रहते हैं. सांस मिटने तक संघर्ष करते हैं. इस संघर्षशील जीवन में कोई सफल होता है और किसी को असफलता हाथ लगती है. बस यूं ही प्रकृति की जीवन श्रंखला चलती रहती है.

अब तस्वीरों में कौवा और चूहा को ही देखिए. दोनों ही भूखे हैं, लेकिन दोनों की भूख अलग है. कौवा भोजन के लिए तड़प रहा है और चूहा अपनी जिंदगी बचाने के लिए. अपनी-अपनी जगह दोनों ही कुदरती नियम का पालन कर रहे हैं. यह नियम है अपनी भूख को शांत करने का संघर्ष.


तस्वीर पहली कुछ यूं बतलाती है कि चूहा दिखा तो उस पर भूखा कौवा झपट पड़ा. जब इंसान
पशु-पक्षियों को दाना-पानी नहीं देंगे तो हालात यही बनेंगे. पशु-पक्षी एक दूसरे को अपना ग्रास बनाएंगे. इसीलिए कौवे ने भी अपनी पेट की आग शांत करने के लिए चूहे को निगल जाने की ठान ली.


दूसरे चित्र में चूहे का संघर्ष नजर आता है. अपनी सूक्ष्म से भी अति सूक्ष्म सांस का अस्तित्व
बचाने के लिए चूहा अपनी सारी ताकत लगा रहा है. एकबारगी तो उसने ऐसा हमला
बोला कि कौवे को भी पीछे दो कदम पीछे खींचने पड़े. 


तीसरी तस्वीर हार और जीत की है. चूहे के हमलावर होने से दो कदम हटने वाले कौवे ने भी इस मर्तबा अपनी सारी शक्ति का भरपूर उपयोग करते हुए चूहे को अपनी चोंच में दबा लिया.
और फिर तब तक छोड़ा ही नहीं, जब तक पूंछ के सहारे मुंह तक चूहे को निगल नहीं गया.
All Pictures By MR. KK Dubey


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