बेशक यह खुशी की बात है.
Saturday, November 4, 2017
भले ही फाइटर मत उतारिए, पर सफर सुरक्षित करिए
बेशक यह खुशी की बात है.
Monday, October 16, 2017
अब याचना नहीं, रण करने में सक्षम बन रहा अपना भारत
यह खुशी का अवसर है. गर्व करने का वक्त है. वजह है, स्वदेशी एंटी-पनडुब्बी जहाज आईएनएस किलटन का भारतीय नौसेना में शामिल होना. 'मेक इन इंडिया' के जरिए, यह हमारे लिए जरूरी ही नहीं अनिवार्य भी है. सैन्य ताकत का बढऩा इसलिए भी जरूरी और लाजिमी हो जाता है क्योंकि दुनिया भर में, विशेष तौर पर पश्चिमी देशों में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है. यह बढ़ता कद चीन और पाकिस्तान सरीखे देशों को रास नहीं आ रहा है. वह लगातार भारत की कूटनीति, सैन्य ताकत और अर्थनीति को छिन्न-भिन्न करने की नाकाम कोशिशों में जुटे हैं. डोकलाम विवाद हो या फिर जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमलों का मसला. दोनों ही स्थितियों में चीन और पाकिस्तान को भारत के साथ-साथ अन्य देशों का भी दबाव झेलना पड़ा है. अब जब नौ सेना में आईएनएस किलटन सरीखा युद्धपोत शामिल हो गया है तो समुद्री सीमा की रक्षा में नौसेना को काफी मदद मिलेगी. बंगाल की खाड़ी और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने में अमेरिका की अप्रत्यक्ष तरीके से मदद होगी. इससे न सिर्फ विस्तारवादी नीति को अपनाए बैठा चीन हतोत्साहित होगा, बल्कि उसे भारत की तरफ न चाहकर भी सकारात्मक रूख अपनाना पड़ेगा. क्योंकि आईएनएस किलटन दुश्मन की पनडुब्बी तक को तहस-नहस करने की ताकत रखता है. इसके अलावा यह शिपयार्ड अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से युक्त है. इसमें हेवीवेट टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट, 76 एमएम कैलिबर मिडियम रेंज बंदूक और दो बहु बैरल 30 एमएम बंदूकें शामिल हैं. फायर कंट्रोल सिस्टम, उन्नत ईएसएम (इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर) सिस्टम, सबसे उन्नत सोनार और रडार को इंस्टॉल किया है. इधर, सोमवार को रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन की मौजूदगी में 'भारतीय नौसेना की बढ़ रही शक्ति को दर्शाने के लिए शामिल किया है किलटन' बयान देकर सेना ने पड़ोसी देशों के चेहरे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं. एक खास बात और है कि किलटन बनाने के सफल प्रयोग के बाद देश के इंजीनियरों ने दूसरे देशों की 'निर्भरता' को खत्म कर दिया है. हालांकि जहाज में आगे चलकर कम दूरी के एसएएम सिस्टम को लगाया जा सकेगा और एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर को उतारा जा सकेगा. लेकिन फिर भी यह भारतीय जहाज रुस में बने उस जहाज की विरासत का दावा करता है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' में उपयोग में लाया गया था. लिहाजा पड़ोसी देशों युद्धवादी नीति बदलकर दोस्ताना नजरिया अपनाना होगा.
Thursday, August 24, 2017
युद्ध में सक्षम तो शांति का पक्षधर भी है भारत
भारत और चीन में आर्मी वॉर से पहले 'कमेंट वॉरÓ छिड़ा हुआ है. चीनी मीडिया लगातार भारत को युद्ध की धमकियां दे रहा है, तो भारत की तरफ से भी 'जवाबी फायरिंगÓ चल रही है. हालांकि 'ग्लोबल टाइम्सÓ में रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही देश 1962 की तुलना में बेहद मजबूत हैं. चीन तो क्या, यह बात हर कोई जानता है कि अब लड़ाई किसी देश के बूते की बात नहीं है. सच्चाई यह है कि भारत, अमेरिका और जापान की दोस्ती चीन को रास नहीं आ रही है, लिहाजा वह दबाव बनाने के लिए यह सब कर रहा है, ताकि इस क्षेत्र में उसका दबदबा कायम रहे. इधर, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया के किसी भी मुल्क में भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं है, सरीखा तल्ख बयान देकर चीन को चेताया है. बेशक उन्होंने इस मसले का हल सकारात्मक तरीके से निकालने की पहल भी यह कहकर की है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन देश की सुरक्षा पर आंच न आने की बात कहकर अपनी युद्धनीति की मंशा भी जता दी है. वहीं, रक्षा मंत्रालय ने युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. रक्षा मंत्रालय ने रविवार को सेना की जरूरतों के अनुरूप परिणाम के लिए बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) में आमूल-चूल परिवर्तन का फैसला लिया है. यह फैसला डोकलाम में भारत और चीन की सेना में तनातनी को देखते हुए लिया है. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारों के अतिरिक्त सरकार ने बीआरओ के महानिदेशक (डीजी) को 100 करोड़ रुपये तक की खरीदारी का वित्तीय अधिकार दिया है. इसके अलावा बीआरओ को सड़क परियोजनाओं के लिए बड़ी निर्माण कंपनियों को शामिल करने का फैसला लेने की भी मंजूरी दी है. इस तरह भारत चीन से मुकाबला करने के लिए हर उस रक्षा नीति पर जोर दे रहा है, जो उसे युद्ध के हालातों में सफल और सक्षम करेगी. लिहाज़ा इस बात को समय रहते हुए चीन जितनी जल्दी समझ ले तो बेहतर रहेगा।
Monday, August 14, 2017
हताशा में गलत बयानबाजी पाक के लिए खतरा
पाकिस्तान के नए नवेले विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा है कि पाकिस्तान हमेशा से ही भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है लेकिन भारत की ओर से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिलता है. आसिफ ने ये बात विदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार रविवार को की गई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समय शांति की कोशिशें कर रहा है, ये समय है कि भारत को आरोप लगाना छोड़ना चाहिए और अच्छा रिस्पॉन्स करना चाहिए.
आसिफ ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग ‘आत्मनिर्णय के अधिकार’ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं जो उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने अपने संकल्पों के माध्यम से "आश्वासन दिया" था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने बॉर्डर की रक्षा करने में सक्षम है लेकिन हम लोग शांति से कश्मीर का मुद्दा सुलझाना चाहते हैं.
आसिफ बोले कि पाकिस्तान लगातार आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है, पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों पर कार्रवाई तेज कर दी है. आपको बता दें कि पाकिस्तान का आतंकवाद के ऊपर ये बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार (NSA) जनरल एचआर मैकमास्टर ने पाकिस्तान को ट्रंप का बेहद सख्त संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने पाक से कहा था कि वह तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और उस जैसे दूसरे आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने की 'दोगली नीति' को बदले, क्योंकि इससे खुद पाक को ही भारी नुकसान हो रहा है.
गौरतलब है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को बीते हफ्ते पनामा पेपर्स लीक मामले में भ्रष्टाचार का दोषी मानकर प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था. इसके बाद नवाज शरीफ की जगह शाहिद खाकन अब्बासी को पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है.
Gaurav lahari