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Saturday, November 4, 2017

भले ही फाइटर मत उतारिए, पर सफर सुरक्षित करिए




लखनऊ को आगरा से जोडऩे वाले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के लिए 24 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक भरा रहा. तेज रफ्तार मार्ग में लड़ाकू और परिवहन वाहनों के टच डाउन करने का एक अध्याय और जुड़ गया. इससे पहले भी 2015 में मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के लड़ाकू विमान मिराज-2000 टच डाउन करके उड़े थे. यानी यूपी की सरजमीं पर सियासत की महत्वपूर्ण महत्वाकांक्षा परिणति स्वरूप बने दोनों ही एक्सप्रेस-वे अब वायुसेना के विमानों को उतारने के काबिल हैं. आसमानी सेना का यह अभ्यास जरूरी होने के पीछे बड़ा तर्क यह है कि देश में विपरीत परिस्थितियों या युद्ध सरीखे हालातों पर विमानों को उतारने के लिए एक नया विकल्प देश-प्रदेश के पास उपलब्ध है.

बेशक यह खुशी की बात है. 
हमें यह गुरूर भी होना चाहिए. 
सियासतदां को इतराना भी चाहिए.
सरकारों का सीना 56 इंच का होना चाहिए.
कि इतना लंबा और कई शहरों के फासले को कम करने वाला हाईवे अब हमारी झोली में है.
लेकिन, 
जरा ठहरिए, सोचिए और संभलिए.
कि क्या फर्राटे भरवाने वाले हाईवे पर आप सुरक्षित हैं. आपकी जिंदगी को कोई जोखिम नहीं है. नहीं, कतई नहीं. यह कहना गलत होगा. यह एक्सप्रेस-वे जिंदगियों को बेहिसाब तरीके से लील रहे हैं. खुद एक्सप्रेस-वे को मंजूरी देने वाले केंद्रीय और राज्य के विभागों के आंकड़े इस बात के गवाह हैं. एनसीआरबी के आंकड़ें उठाएं या फिर पीआईबी द्वारा रिलीज सेंट्रल मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज की रिपोर्ट पर आंखें गड़ाई जाएं. तो निश्चित तौर पर आंखें फटी रह जाएंगी. 
यमुना एक्सप्रेस-वे की ही बात करें तो अगस्त 2012 से लेकर अब तक 4000 से ज्यादा एक्सीडेंट यहां हो चुके हैं. 2012 के 275 हादसों में 33, 2013 के 896 हादसों में 218, 2014 के 771 हादसों में 127, 2015 के 919 हादसों में 142 और 2016 के 1193 हादसों में 128 मौतें हो चुकी हैं. 2017 में भी मौत का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है. अभी हाल ही में 3 नवंबर 2017 को स्कूली बच्चों से भरी हिमाचल प्रदेश से आ रही बस का टायर फटने से ड्राइवर की मौत हुई. इसमें 30 बच्चे घायल हुए और आधा दर्जन से ज्यादा स्टाफ को गहरी चोटें आईं. एक दिन पहले ही आगरा शहर के एक युवा कारोबारी ने ड्राइवर समेत इसी एक्सप्रेस-वे पर दम तोड़ दिया. अब सीधे तौर पर यह कहना जरूरी भी हो गया है कि एक तरफ तो सरकार इन एक्सप्रेस-वे पर फाइटर प्लेन को उतार रही है और दूसरी ओर उन्हीं एक्सप्रेस-वे पर सवारी वाहन ही सुरक्षित तरीके से नहीं दौड़ पा रहे हैं. 





मुश्किल इतनी भर नहीं है, एक्सप्रेस-वे न सिर्फ मौत के रास्ते साबित हो रहे हैं बल्कि लोगों को उनकी मंजिल तक भी नहीं पहुंचा पा रहे हैं. जिस उददेश्य के लिए यह हाईवे बनाए गए, मसलन इन पर फर्राटे भरते हुए कम समय में एक लंबी दूरी को तय किया जा सकता है, वह भी उददेश्य तमाम जिंदगियों का अधूरा ही रह जाता है. और ऊपर से सरकार देश भर में इसी तरह के एक-दो नहीं बल्कि 22 एक्सप्रेस-वे बनाने का दावा कर रही है. और सभी एक्सप्रेस-वे पर फाइटर प्लेन उतारने का भी दंभ भर रही है. इनमें दिल्ली-मुरादाबाद, दिल्ली-मेरठ और मुंबई-पुणे सरीखे कई एक्सप्रेस-वे शामिल हैं. लेकिन इससे इतर होकर यदि हम इन एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षित सफर की बात करते हैं तो वह कहीं होता दिखता नहीं है. बेशक यह युद्ध और आपातकाल की दृष्टि से उचित हो सकता है, लेकिन दोनों ही परिस्थितियां गाहे-बगाहे कई दशकों में एक या दो बार ही आती हैं. चीन और पाकिस्तान से विवाद इतने चरम पर हैं, फिर भी युद्ध जैसे हालात नहीं बनते दिख रहे हैं.
दूसरी तरफ, पीआईबी द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट को ही लीजिए. ज्यादा दूर नहीं सिर्फ 2016 के आंकड़े ही उठा लीजिए. इस साल 4 लाख 80 हजार से अधिक एक्सीडेंट सड़कों पर हुए, और उनमें एक लाख 50 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई. इतना ही नहीं इन हादसों में मरने वाले 83 फीसद लोग 18 से 65 आयु वर्ग के थे. जबकि 18 साल से कम आयु वर्ग के सात फीसदी किशोरों को इन हाई स्पीड सड़कों ने लील लिया. चार लाख से अधिक हादसों में पांच लाख लोग घायल भी हुए. अब इसे क्या कहा जाएगा. यह दु:ख की बात है. 
सरकारों और उसमें बैठे जिम्मेदारों को मानव सुरक्षा के प्रति गंभीर होना पड़ेगा. 
उन्हें सफर कराएं, 
तेज कराएं, 
कम दूरी का कराएं. 
अच्छी बात है, लेकिन 
सुरक्षित कराएं, 
सहूलियत भरा कराएं,
सुकुन से घर पहुंचाएं, 
समय से कराएं, 
यह और भी अच्छा रहेगा. 
सरकार के लिए.


गौरव लहरी.

Monday, October 16, 2017

अब याचना नहीं, रण करने में सक्षम बन रहा अपना भारत 

यह खुशी का अवसर है. गर्व करने का वक्त है. वजह है, स्वदेशी एंटी-पनडुब्बी जहाज आईएनएस किलटन का भारतीय नौसेना में शामिल होना. 'मेक इन इंडिया' के जरिए, यह हमारे लिए जरूरी ही नहीं अनिवार्य भी है. सैन्य ताकत का बढऩा इसलिए भी जरूरी और लाजिमी हो जाता है क्योंकि दुनिया भर में, विशेष तौर पर पश्चिमी देशों में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है. यह बढ़ता कद चीन और पाकिस्तान सरीखे देशों को रास नहीं आ रहा है. वह लगातार भारत की कूटनीति, सैन्य ताकत और अर्थनीति को छिन्न-भिन्न करने की नाकाम कोशिशों में जुटे हैं. डोकलाम विवाद हो या फिर जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमलों का मसला. दोनों ही स्थितियों में चीन और पाकिस्तान को भारत के साथ-साथ अन्य देशों का भी दबाव झेलना पड़ा है. अब जब नौ सेना में आईएनएस किलटन सरीखा युद्धपोत शामिल हो गया है तो समुद्री सीमा की रक्षा में नौसेना को काफी मदद मिलेगी. बंगाल की खाड़ी और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने में अमेरिका की अप्रत्यक्ष तरीके से मदद होगी. इससे न सिर्फ विस्तारवादी नीति को अपनाए बैठा चीन हतोत्साहित होगा, बल्कि उसे भारत की तरफ न चाहकर भी सकारात्मक रूख अपनाना पड़ेगा. क्योंकि आईएनएस किलटन दुश्मन की पनडुब्बी तक को तहस-नहस करने की ताकत रखता है. इसके अलावा यह शिपयार्ड अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से युक्त है. इसमें हेवीवेट टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट, 76 एमएम कैलिबर मिडियम रेंज बंदूक और दो बहु बैरल 30 एमएम बंदूकें शामिल हैं. फायर कंट्रोल सिस्टम, उन्नत ईएसएम (इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर) सिस्टम, सबसे उन्नत सोनार और रडार को इंस्टॉल किया है. इधर, सोमवार को रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन की मौजूदगी में 'भारतीय नौसेना की बढ़ रही शक्ति को दर्शाने के लिए शामिल किया है किलटन' बयान देकर सेना ने पड़ोसी देशों के चेहरे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं. एक खास बात और है कि किलटन बनाने के सफल प्रयोग के बाद देश के इंजीनियरों ने दूसरे देशों की 'निर्भरता' को खत्म कर दिया है. हालांकि जहाज में आगे चलकर कम दूरी के एसएएम सिस्टम को लगाया जा सकेगा और एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर को उतारा जा सकेगा. लेकिन फिर भी यह भारतीय जहाज रुस में बने उस जहाज की विरासत का दावा करता है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' में उपयोग में लाया गया था. लिहाजा पड़ोसी देशों युद्धवादी नीति बदलकर दोस्ताना नजरिया अपनाना होगा.

Thursday, August 24, 2017

युद्ध में सक्षम तो शांति का पक्षधर भी है भारत 

भारत और चीन में आर्मी वॉर से पहले 'कमेंट वॉरÓ छिड़ा हुआ है. चीनी मीडिया लगातार भारत को युद्ध की धमकियां दे रहा है, तो भारत की तरफ से भी 'जवाबी फायरिंगÓ चल रही है. हालांकि 'ग्लोबल टाइम्सÓ में रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही देश 1962 की तुलना में बेहद मजबूत हैं. चीन तो क्या, यह बात हर कोई जानता है कि अब लड़ाई किसी देश के बूते की बात नहीं है. सच्चाई यह है कि भारत, अमेरिका और जापान की दोस्ती चीन को रास नहीं आ रही है, लिहाजा वह दबाव बनाने के लिए यह सब कर रहा है, ताकि इस क्षेत्र में उसका दबदबा कायम रहे. इधर, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया के किसी भी मुल्क में भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं है, सरीखा तल्ख बयान देकर चीन को चेताया है. बेशक उन्होंने इस मसले का हल सकारात्मक तरीके से निकालने की पहल भी यह कहकर की है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन देश की सुरक्षा पर आंच न आने की बात कहकर अपनी युद्धनीति की मंशा भी जता दी है. वहीं, रक्षा मंत्रालय ने युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. रक्षा मंत्रालय ने रविवार को सेना की जरूरतों के अनुरूप परिणाम के लिए बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) में आमूल-चूल परिवर्तन का फैसला लिया है. यह फैसला डोकलाम में भारत और चीन की सेना में तनातनी को देखते हुए लिया है. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारों के अतिरिक्त सरकार ने बीआरओ के महानिदेशक (डीजी) को 100 करोड़ रुपये तक की खरीदारी का वित्तीय अधिकार दिया है. इसके अलावा बीआरओ को सड़क परियोजनाओं के लिए बड़ी निर्माण कंपनियों को शामिल करने का फैसला लेने की भी मंजूरी दी है. इस तरह भारत चीन से मुकाबला करने के लिए हर उस रक्षा नीति पर जोर दे रहा है, जो उसे युद्ध के हालातों में सफल और सक्षम करेगी. लिहाज़ा इस बात को समय रहते हुए चीन जितनी जल्दी समझ ले तो बेहतर रहेगा।

Monday, August 14, 2017

हताशा में गलत बयानबाजी पाक के लिए खतरा


पाकिस्तान के नए नवेले विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा है कि पाकिस्तान हमेशा से ही भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है लेकिन भारत की ओर से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिलता है. आसिफ ने ये बात विदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार रविवार को की गई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समय शांति की कोशिशें कर रहा है, ये समय है कि भारत को आरोप लगाना छोड़ना चाहिए और अच्छा रिस्पॉन्स करना चाहिए.
आसिफ ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग ‘आत्मनिर्णय के अधिकार’ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं जो उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने अपने संकल्पों के माध्यम से "आश्वासन दिया" था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने बॉर्डर की रक्षा करने में सक्षम है लेकिन हम लोग शांति से कश्मीर का मुद्दा सुलझाना चाहते हैं.
आसिफ बोले कि पाकिस्तान लगातार आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है, पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों पर कार्रवाई तेज कर दी है. आपको बता दें कि पाकिस्तान का आतंकवाद के ऊपर ये बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार (NSA) जनरल एचआर मैकमास्टर ने पाकिस्तान को ट्रंप का बेहद सख्त संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने पाक से कहा था कि वह तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और उस जैसे दूसरे आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने की 'दोगली नीति' को बदले, क्योंकि इससे खुद पाक को ही भारी नुकसान हो रहा है.
गौरतलब है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को बीते हफ्ते पनामा पेपर्स लीक मामले में भ्रष्टाचार का दोषी मानकर प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था. इसके बाद नवाज शरीफ की जगह शाहिद खाकन अब्बासी को पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है.

Gaurav lahari