
छाया है वसंत का उल्लास
हो रहा शीत ऋतु का ह्रास
धरा ने ओढ़ी धानी चुनरिया
खेतों में पसरी पुष्प चदरिया
दिख रहा उत्सव का आकाश
छाया है वसंत का उल्लास
राहों में बिखरी गुनगुनी धूप
अमुआ पर भी झूले हैं पुष्प
गेहूं पर भी चढऩे लगा है रंग
हिलमिल कर रहें हम भी संग
हर घर में फैले ऐसा प्रकाश
छाया है वसंत का उल्लास
हे मां, वीणावादिनी वर दे हमको
सब जग खुशी, और पूजें तुमको
हंस सी चलते रहे हम चाल
विद्या कौशल और बुद्धि विशाल
जिससे हो बुराइयों का विनाश
छाया है वसंत का उल्लास





No comments:
Post a Comment